कुक्कुट पालन जैसे मुर्गीपालन, बटेर पालन और अंडा उत्पादन के विषय में सम्पूर्ण जानकारी और सफलता की कहानियां
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10 टिप्पणियाँ
गर्मी के मौसम में मुर्गियों की देखभाल के लिए, कुछ महत्वपूर्ण उपाय हैं जो पालनकर्ता कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं, मुर्गियों को पर्याप्त छाया में रखना, समय समय पर पानी देना , शेड को ठंडा रखना, मुर्गियों को धुमने के लिए पर्याप्त जगह देना, टीकाकरण और अन्य आवश्यक गतिविधियाँ अधिक जानकारी के लिए विडियो पूरा देखें |
ठंड के मौसम में मुर्गियों की इस प्रकार रखरखाव की जाय तो इस व्यवसाय से बेहतर मुनाफा लिया जा सकता है |
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के छात्र आदित्य ने बहुत ही कम खर्च में एक अंडा इन्क्युबेटर बनाया है | इसे बनाना बहुत ही आसान और कम खर्चीला है , आप भी बना सकते हैं |
ठण्ड में चूजों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है | प्रस्तुत फिल्म में हमारे वैज्ञानिक द्वारा ठण्ड के मौसम में चूजों के रख-रखाव और टीकाकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है | अगर आप भी पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हैं या बोइर्लर चिकेन्स ब्रूडर खोलने की योजना बना रहे हैं तो यह फ़िल्म आपके लिए काफी काम की है |
Poultry Farming (मुर्गी पालन)
A video module which talks about a better option to take up for every Poultry Farmers around .
बटेर पालन ने रणधीर की किस्मत को बदल दिया है. जहाँ वे कुछ रुपयों के लिए मुहताज थे आज वे लाखों रूपये अपने गांव में रह कर अर्जित कर हे हैं. बटेर पालन का व्यवसाय कम स्थान, कम समय व कम लागत से शुरू किया जा सकता है। थोड़े ही दिनों मे इस व्यवसाय से लाभ प्राप्त होने लगता है।यह व्यवसाय पूरे वर्श किया जा सकता है। जितने क्षेत्र मे एक मुर्गी को रखा जाता है उतने ही क्षेत्र में 8-10 बटेर पाला जा सकता है। पांच सप्ताह की उम्र मे यह करीब 300 ग्राम का तैयार हो जाता है। 6-7 सप्ताह मे बटेर अंडा भी देना षुरू कर देती है। बाजार में प्रतिअंडा 3 रूप्ये की दर से बिक जाता है। जबकि एक बटेर करीब 60 रूप्ये मे बेचा जाता है। रोगप्रतिरोधक क्षमता अधिक रहने के कारण मुर्गियों की तुलना में बटेर में बीमारियाॅ भी लगभग नही के बराबर होती है। रंधीर कुमार को षुरूआत में 200 बटेर चूजों को 40 दिन तक पालन करने पर 6000 रूप्ये की लागत आयी और 1200 रूप्ये मे इसकी ब्रिकी हुई। इससे उत्साहित होकर इस व्यवसाय को बड़े स्तर पर करने की लालसा भी उत्पन्न हुई। इन्होने बटेर की लेयर फार्मिंग की आज करीब 4000 बटेर का पालन कर इन्हें प्रतिमाह 25-30 हजार
समित कुमार की सफलता की कहानी : कॉमर्स से मास्टर डिग्री करने के बाद समित के सामने वही समस्या आई जो आज देश के करोड़ों युवाओं को होती है यानि नौकरी की.... शुरुआत में जीवन वसर के लिए उन्होंने नौकरी भी किया लेकिन इन्हें नौकरी रास नहीं आई और वापस अपने गांव लौट आये.... खेती के लायक नौ एकड़ जमीन थी सो समित ने खेती में हाथ अजमाया लेकिन धान-गेहूं जैसे पारंपरिक खेती से कुछ हाथ नहीं आया... समित ने अब उलझन सुलझाने के लिए कृषि विज्ञानं केंद्र मधेपुरा की ओर रुख किया... जब समित केंद्र पहुचे उन दिनों वहां कुक्कुट पालन पर प्रशिक्षण चल रहा था... वैज्ञानिकों ने समित को उक्त प्रशिक्षण में भाग लेने की सलाह दी... प्रशिक्षण के बाद समित को कुक्कुट पालन में अपना भाग्य अजमाने की इच्छा प्रबल हुई.... अब वे अक्सर केंद्र पर आकर कुक्कुट पालन की बारीकियों को समझने लगे... जब उन्हें लगा की लेयर फार्मिंग से अंडा उत्पादन के कार्य को पूरी तरह शुरू कर देना चाहिए तब पूंजी की समस्या आयी क्योंकि लेयर फार्मिंग में ज्यादा पूंजी की आवश्यकता पड़ती है.... समित ने पूंजी के लिए दोस्तों और सगे सम्बन्धियों को अपनी योजना के बारे में बताया
रंजय के पास रहने वाले घर के और मामूली सी चार कठ्ठे खेत के अलावा कहीं इनके पास जमीन नहीं थी. न तो पूंजी थी और न ही खेती के लिए पर्याप्त जमीन, लेकिन इनमें सकारात्मक उर्जा की कोई कमी नहीं थी... एक दिन वे कृषि विज्ञान केन्द्र, खगड़िया पहुंचे और अपने लिए यहाँ से जुड़कर कुछ कार्य करने का अवसर तलाश करने लगे, कृषि विज्ञान केन्द्र और रंजय पासवान ने ट्रायल के रूप में कम लागत की अर्द्ध सघन मुर्गीपालन करने की योजना बनाई और 200 वनराजा चूजों को बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय, पटना से मंगवा कर अर्द्ध सघन बैकयार्ड यानि घर के पीछे मुर्गीपालन की शुरूआत की। इन्होने 200 वनराजा मुर्गियों से लगभग 11000 अंडे तथा 500 किलो मांस पहले साल में ही प्राप्त किया जिससे उनका शुद्ध आय लगभग 1 लाख रूपया हुआ | जहाँ कभी रंजय एक-एक रूपये के लिए मुंहताज थे उन्हें पहले साल में ही मात्र 4 कट्ठे भूमि पर कम लागत की अर्द्ध सघन बैकयार्ड मुर्गीपालन से लगभग 1 लाख शुद्ध आय हुई, बस अब यहीं से रंजय की जिन्दगी ने करवट ले ली ।
A success story of a Broiler poultry farmer Mr. Sanjeev Kumar, he was a day labourer and ever had wages on 1200 rupees a month. Ones a day he visited Krishi Vigyan Kendra, Araria. From there, he took technical information about Broiler poultry farming. Now he is doing successfully his business and earning rupees 10000 per day.
